स्वच्छ दिमाग

लोग जो पढने मे बेकार थे, लड़कियो को जो छुप छुप के देखा करते थे पर बात करने से जिनका गला सूख जाता था. गाली लड़की के नाम देते थे वो लोग या तो संघ मे जाकर देशहित की बाते करते थे. कालेज तक एक महिला मित्र नहीं बना सके तो बजरंग दल या ऐसी ही किसी कथित हिन्दूवादी, राष्ट्रवादी संघटन से जुड गए. ये लोग बात बात पर भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं परंपराओ की दुहाई देते देखे जाते हैं. कुछ इनमे से बीजेपी मे चले गए. कुछ कार्यकरता रह गए कुछ नेता बन गए. पर कुन्ठा से ग्रस्त जीव बेचारा, क्या करे ? जब भी औरत से हारने लगता है वो दबी हुई कुन्ठा बाहर आ ही जाती है. बहुत बार देखा गया है नेतागिरी मे महिलाओ को अपशब्द कह देते हैं, पार्टी खुद को उस बयान से अलग कर लेती है, फिर बात खत्म. 

थोडे ही दिन पहले बसपा अध्यक्षा मायावती जी पर बीजेपी के दयाशंकर सिंह ने अभद्र टिप्पणी की थी, बवाल मचा तो कुछ दिन सिंह को पार्टी से दूर किया और बात खत्म. वैसे दिल्ली बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी भी महिलाओ पर अभद्र व्याख्यान दे चुके हैं. अब ये हुआ है प्रियंका गांधी के साथ और ऐसा करने वालें भारतीय संस्कृति का रक्षक है विनय कटियार. घटिया बयान बाजी बौखलाहट का परिणाम भी हो सकती है. ऐसे शब्दों का प्रयोग कर के आप बता रहे होते हैं की आप मानसिक रूप से विकलांग हैं और ऊपर बताए गए लोगो मे से एक हैं. ऐसा नही है की और किसी पार्टी के नेता अभद्र व्याख्यान नही करते पर यहाँ बात उस पार्टी की है जो हिन्दूवादी बोलती है, साथ ही प्रधानमंत्री अपनी माताजी के साथ हर फोटो को शेयर करना नही भूलते हैं. फिर इन्होने योजना भी चला रखी है “बेटी बचाओ, बेटी पढाओ” तो फिर ये दिखावा क्यों. सच तो ये है की पहले मोदी को अपने चेलों को पढाना और सिखाना चाहीए ताकी वे ओरों के लिए मिसाल पेश कर सकें. पर यहाँ गुरु चेला सब बराबर हैं. मोदी ने चाहे महिलाओं के लिये ना कहा हो पर बोल उनके भी तोले हुए नहीं लगते. नारी का सम्मान मजाक बना कर रख दिया गया है और बडे दुर्भाग्य की बात है की कल हम 68 वां गणतंत्र दिवस मनाएंगे अपने बेलगाम दोलन करने वाली जुबान और बदहवास विचारों के साथ. हाँ कई सालों से यही तो करते आए हैं. कभी दशहरा हो तो रावण जला देते हैं, नवरात्रि हो तो कन्या पूज लेते हैं. ये सब क्या है, कुन्ठा निकालने का तरीका ही तो है. बीमार आदमी हमेशा स्वास्थ की बातें करते पाए जाते हैं वैसे ही हमारे देश मे नारी सम्मान की बहुत बाते होती हैं, ध्यान रहे सिर्फ बातें होती है. बाकी मै और आप जानते हैं उसके अलावा क्या क्या होता है. 

राजनीति करो पर शब्द सम्भाल कर खर्च करो. हारने का डर ही अगर ऐसी बातें करवाता है तो घर बैठ जाओ. दिमाग स्वच्छ रखो भारत स्वच्छ अपने आप हो जाएगा.

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