गौ माता

कुछ लोग शायद विकासवाद को नही समझते माता हमारी प्लास्टिक खा रही है तो यह न समझना हमे पता नही है, इसके परिणाम अच्छे ही होंगे  भले ही दूरगामी हों. कैसे ? अरे यही तो है विकासवाद, एक दिन गाय माता प्लास्टिक को पचा लेने मे सक्षम हो जाएगी तब प्लास्टिक का कचरा पर्यावरण को नुकसान भी नही पहुचा सकेगा. उस दिन हमको चारे की परवाह करने की भी जरुरत नही होगी, वैसे भी चरागाह रह ही कितने गए हैं. तब हम फिर से विश्वगुरू के रूप मे पहचाने जाएंगे. बताओ कुछ गलत है इसमे हां कभी कभी कोई इक्की दुक्की गाय प्लास्टिक खा के मर जाती है.

और जो तुम ये कहते हो लावारिस गाय सडक पर घूम रही है, दरअसल वह स्वतंत्रता है. वह इतनी स्वतंत्र है की कचरे मे से भी खाना ढूँढ ले, कहीं भी रात गुजार ले. सडक पर चलना केवल आदमी का ही अधिकार तो नही और जब हाथी और घोडे सडक पर चले तो कोई बात नहीं  तुम्हारी परेशानी बस गाय है. आदमी सडक किनारे शौच कर सकता है तो गाय क्यों नहीं ?  

 बीफ – बीफ करते हो न तुम क्यों खाते हो गौवंश को ? केरल, नागालैन्ड़, मणिपुर, अरुणाचल, आसाम आदि का मामला अलग है. केरल मे चुनाव का लफडा है, वोट मांगने हैं सो कह दिया की हम कमल वाले आप के लिए अच्छे बीफ की व्यवस्था करेंगे. अब ये सवाल मत करना की क्यों उत्तर भारत मे बीफ पर जूते चल जाते हैं फिर क्यों पूर्वोत्तर मे लोग बीफ मजे से खाते हैं ? देखो मायने ये रखता है की कैसे जनता को बेवकूफ बनाया जा सकता है, कैसे उनके गुस्से को वोट मे बदला जा सकता है. बीफ निर्यात मे कितना नाम कमाया हमने मालूम भी है ? कितने सवर्ण हिंदू, जैन लगे पडे हैं इस कारोबार मे जानते भी हो ? हमारी माँ है हम जो चाहे करें पर तुम मुसलमान तो दूर ही रहना. 

विलाप क्यों करते हो जो कल कोई मारा गया था. गौरक्षक थे खूब मारा, पुलिस भी नही मारती इतना मारा, मारते क्यों न मुसलमान थे , गौ माता को ले जा रहे थे. अरे वो खूब गिड़ गिडाए की हमने पालने के लिए खरीदी है, नगर निगम से खरीद की रसीद भी दिखाई. बताया की डेयरी का काम करते हैं पर वो बेचारे क्या जाने मुसलमान को गाय पालनी भी नही है. गुस्सा बढता गया और वो पीटते गए. पहलू खाँ मारा गया, उन मे से एक अर्जुन नाम का लडका था उसे जाने दिया, हिंदू था ना इसलिए. हिंदू पालता है गाय और वही पाले बस. मुसलमान तो दूर ही रहे गाय के नाम से भी. इंसान की जान क्या मायने रखती है इस नश्वर दुनिया मे ? शक के दायरे मे ही अखलाख को मारा था और अब पहलू, कुछ समझे ? अरे गाय तो बहाना है इनका असली मकसद तो मुसलमान और दलितों को निशाना बनाना है. वरना ऊना मे इतना हुड दंग क्यों होता वहाँ तो गाय पहले से मरी हुई थी ? समझो बात को.

उन तथाकथित गौरक्षकों को संघ और सरकार का संरक्षण प्राप्त है हां दिखावे के लिए देश के पीएम बाद मे गौरक्षकों को थोडा डाँट लेते हैं, करना पड रहा है जी. जब देश मे सब तरफ कमल होगा तब उनको यह नाटक भी नहीं करना पडेगा. राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने तो कार्यवाही का समर्थन तक किया है बस कानून हाथ मे लेने को जरूर गलत बताया है. इस से क्या पता लगता है ? यही के सरकार भी नहीं चाहती के मुसलमान गाय रखें. राज्यसभा मे नकवी साहब ने कहा की ऐसा कुछ हुआ ही नहीं, बनना पडा धृतराष्ट्र, बनना ही पडेगा. पद और सत्ता की लालसा मे इतन अंधा-बहरा भी बनना पडता है की अपने लोगों की चीख पुकारों को भी अनसुना किया जा सके.

तय दलितों और मुसलमानों को करना है वे मरते रहेंगे या आवाज उठा कर इन कृत्यों के विरुद्ध आवाज उठाएंगे.