परहित के लिए रोहित 

स्कूल सवर्ण लोगो का था उनके मोहल्ले मे था | हम रैगर समाज के काफी छात्र पढने जाया करते थे. कुछ सवर्ण छात्र-छात्राएं भी पढने आते थे. एक दिन किसी सीनियर छात्र ने मुझ से नाम पूछा. मैने जवाब दिया ‘दीपक’. फिर पूछा आगे ? आगे क्या ? अरे आगे क्या लिखता है जैसे मै शर्मा हूँ वैसे बता.. वर्मा मैने कहा. फिर पूछा वर्मा क्या होता है? नहीं पता. अरे मेरी जाति ब्राह्मण है तेरी क्या है. जाति क्या होती है मैने हिम्मत कर के फिर पूछा ? उसने कहा कल पता कर के आना. फिर घर आकर मैने माँ से पूछा जाति क्या होती है.

ये वार्तालाप कक्षा 2 और कक्षा 9 के छात्रो का है. गाँव मे रहते थे तब सोचते थे की बाद मे ऐसा कुछ नही होगा. चीजें मिट रही है, जयपुर चले जाएंगे तब सब ठीक हो जाएगा. दिल बहलाने को ये ख्याल अच्छा था, जयपुर भी आ गया. पर बदला कुछ नहीं.

रोहित वेमुला के साथ जो हुआ वह अपने आप मे कम बात नहीं है. एक शोध का छात्र, विश्वविधालय के छात्रावास से निकाला जाता है. वो सर्दी मे सडक पर डेरा डालता है. किस अधिकार से उसे होस्टल से निकाला आपने? एक पढा लिखा आदमी जो करता वो सब किया कुलपति से लेकर तत्कालीन एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी तक को शिकायत की, पर मिला क्या?  न्याय मिला ?  इसके उलट हमारे प्रधान सेवक ने हैदराबाद विश्वविधालय के वीसी अप्पा राव को मिलेनियम अवार्ड से नवाजा. आप साबित क्या करना चाहते हैं ? एक तरफ आप रोहित को भारत माँ का बेटा बोलते हो और दूसरी तरफ कातिल को अवार्ड देते हो. आप के बहुमत मे बडा हाथ इस तबके का भी है, आप की सरकार इन ही के दम पर बनी है वर्ना सवर्ण तो हमेशा से आप को ही वोट देते आए हैं, कितनी बार सरकार बनी आपकी ? अनुसूचित जाति आयोग बस नोटिस दे कर अपना काम पूरा समझ लेता है. क्योकि वहाँ भी सवर्ण भरे पडे है. उनको क्या पता दलित होना क्या होता है.  

रोहित को न्याय दिलाने मे आप की कोई रुचि नही है. जिस तरह का प्रदर्शन कल देश भर मे देखा गया उस से समझ आता है चेतना का विस्तार . उनको खुद अपने दम पर आगे भी लडाई लड़नी पडेगी. और यही एक मात्र तरीका है.