चार पाहिए

जब एक आदमी ही सरकार हो या देश हो तो समझ लें की देश दुर्गति की तरफ बढ रहा है. सीट की पेटी बाँध कर भी आप कुछ नहीं कर सकोगे. फोर व्हील ड्राइव मे अगले और पिछले पाहियों को अलग से पावर दी जाती है ताकि खराब रास्तों पर बिन फसे चल सके. कुछ ऐसी ही फोर व्हील ड्राइव बनाई गई थी संविधान. जिसका चौथा पाहिया बना मीडिया इसमे मिलावट की संभावना सब से कम थी. पर आज सभी पाहिए अपनी स्वतंत्रता खो चुके हैं. कुछ लोग ही गुलाम बने रहना चाहते हैं. इस गुलामी के भी अपने मजे हैं. सच मे, एक पत्रकार महाशय तो तिहाड भी जा चुके है घूस के चक्कर मे पर अभी उन्हे जेड सुरक्षा प्राप्त है. इन लोगो के अलावा भी कई और हैं जो चमचे बने हुए हैं मोदी के. थोडे ही दिनो पहले इंटरव्यू हुआ था साहब का, अर्णव गोस्वामी ने बहुत सलीके से वो स्क्रिप्टेड इंटरव्यू लिया गया था. 

न्याय मे भी सरकारी दखल जबर्दस्त तरीके से बढगया है. अगस्ता वास्टलेन्ड वाले मामले मे कोर्ट डायरी को सबूत मान लेती है वहीं सहारा और बिडला मोदी घूस वाले मामले मे कोर्ट डायरी को सबूत मानने से मना कर देती है, समझ के बाहर है. 

अम्मा और शशीकला का मामला है 1996 का पर इतने पुराने केस मे शशीकला को जेल भेजा गया है तो क्यों गोधरा कांड 2002 को री ओपेन किया जाता, जबकी सब जानते हैं की मोदी को किस हद तक जाकर बचाया गया है.

इसके अलावा दक्षिणपंथी संगठन अभिनव भारत एवं आरएसएस के सदस्यों को मालेगांव धमाके में गिरफ्तार किया गया था। इस पूरे मामले की जांच हेमंत करकरे ने की थी वही हेमंत जिसने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमले मे अपने प्राण देश के लिये बलिदान किये. कोई उस जांच पर सवाल उठा सकता है ? प्रग्या ठाकुर भी गिरफ्तार की गई थी. आठ सालों से जेल मे थी एक दिन रिहा कर दि जाती है. असीमानंद जो की मेलगांव, अजमेर धमकों का आरोपी था उसे भी पिछले साल सितम्बर मे बेल मिल जाती है.

ये सब क्या है ? पहले केस कमजोर करो जैसे प्रग्या ठाकुर पर से मकोका हटाया गया फिर चुप के से बरी कर दो. सवाल फिर वही है धमाके या दंगे किये किसने किस की शह पर ? 

अगले अध्याय लिखते हुए आरएसएस के ग्यारह लोग जासूसी करते हुए पकडे गए हैं और वो भी पाकिस्तान के लिए. इसमे लिप्त लोगो की लिस्ट लम्बी हो सकती है, अखबारों की पंक्तियां छोटी होती जा रही हैं. कुछ नाम विश्वहिंदू परीषद के लोगो के भी हैं. ये वही राष्ट्रवादी लोग हैं जो गाली के अलावा आपको देशभक्त होने का प्रमाण पत्र या पाकिस्तान का वीजा हाथो हाथ दे देते हैं. सब आरएसएस वालों को सांप सूंघ गया है ? नही वो अपने आदमीयों को बचाने मे लगे हैं. हम बात भूलते जाते हैं और फिर हर बार की तरह ये लोग भी जेल से बाहर होंगे. कोर्ट, अखबार, जांच एजेंसियां सब मिल कर काम करेंगी. जेएनयू के छात्र उमर खालिद का संबन्ध पाक से है ये बकवास इन लोगो ने उछल उछल कर कही थी. हर टीवी चैनल पर हल्ला हुआ फिर इस बार इतना सन्नाटा क्यों है भाई ? राष्ट्रवादी जुबान पर छाले पड़ गए ? मुझे जज भी दूध के धुले नही लगते वरना क्यों जज का बेटा ही जज बनता ? जज भी इंसान है आखिर दिल उसके पास भी है और दिल है तो मचल भी सकता है. पैसे और रिटायरमेंट के बाद का जुगाड़ उसको भी करना है राजनेता बनना है. फिर उम्मीद किस से की जा सकती है ? 

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